India · CBSE Learning Outcomes
Class 12 समाजशास्त्र.
कक्षा 12 का समाजशास्त्र पाठ्यक्रम भारतीय समाज की संरचना, जनसांख्यिकी, सामाजिक संस्थाओं और सामाजिक परिवर्तन का गहन अध्ययन प्रस्तुत करता है। यह छात्रों को समकालीन सामाजिक मुद्दों, असमानताओं और आंदोलनों का आलोचनात्मक विश्लेषण करने में सक्षम बनाता है।

01भारतीय समाज की जनसांख्यिकीय संरचना
यह इकाई जनसांख्यिकी के सिद्धांतों और भारतीय जनसंख्या की विशेषताओं का विश्लेषण करती है। इसमें जनसंख्या वृद्धि के प्रभावों और नियंत्रण नीतियों पर भी चर्चा की गई है।
माल्थस और जनसांख्यिकीय संक्रमण के सिद्धांतों का अध्ययन। यह विषय जनसंख्या वृद्धि के कारणों और परिणामों की वैज्ञानिक व्याख्या करता है।
भारत की जनसंख्या के आकार, वृद्धि दर, आयु संरचना और लिंग अनुपात का विश्लेषण। इसमें ग्रामीण-नगरीय भिन्नताओं पर भी प्रकाश डाला गया है।
भारत सरकार की जनसंख्या नीतियों और परिवार नियोजन कार्यक्रमों का मूल्यांकन। यह विषय जनसंख्या नियंत्रण में शिक्षा और जागरूकता की भूमिका को रेखांकित करता है।

02सामाजिक संस्थाएं: निरंतरता और परिवर्तन
इस इकाई में जाति व्यवस्था, जनजातीय समुदायों और परिवार जैसी प्रमुख सामाजिक संस्थाओं का अध्ययन किया गया है। यह इन संस्थाओं में ऐतिहासिक और समकालीन परिवर्तनों को दर्शाता है।
जाति व्यवस्था की उत्पत्ति, विशेषताएं और समकालीन भारत में इसमें आए परिवर्तनों का अध्ययन। यह विषय जाति के राजनीतिकरण पर भी प्रकाश डालता है।
भारत में जनजातीय समुदायों का वर्गीकरण और उनकी प्रमुख सामाजिक-आर्थिक समस्याएं। इसमें जनजातीय एकीकरण बनाम अलगाव की बहस को भी शामिल किया गया है।
भारतीय समाज में परिवार के विभिन्न स्वरूपों और नातेदारी व्यवस्था का विश्लेषण। यह विषय संयुक्त परिवार के विघटन और एकाकी परिवार के उदय की व्याख्या करता है।

03सामाजिक असमानता और बहिष्कार के स्वरूप
यह इकाई समाज में व्याप्त पूर्वाग्रहों, भेदभाव और सामाजिक बहिष्कार की प्रक्रियाओं का विश्लेषण करती है। इसमें हाशिए पर रहने वाले समूहों के संघर्षों को शामिल किया गया है।
समाज में व्याप्त पूर्वाग्रहों, रूढ़ियों और भेदभाव के कारणों और परिणामों का अध्ययन। यह विषय सामाजिक बहिष्कार की प्रक्रिया को गहराई से समझाता है।
दलितों और अन्य पिछड़े वर्गों के ऐतिहासिक संघर्ष और उनके उत्थान के लिए किए गए संवैधानिक प्रावधान। इसमें आरक्षण नीति के सामाजिक प्रभावों पर भी चर्चा की गई है।
भारतीय समाज में महिलाओं की ऐतिहासिक और वर्तमान स्थिति का आलोचनात्मक विश्लेषण। यह विषय लैंगिक असमानता और महिला अधिकार आंदोलनों पर केंद्रित है।
दिव्यांग व्यक्तियों के प्रति सामाजिक दृष्टिकोण और उनके अधिकारों के लिए किए गए संघर्ष का अध्ययन। यह विषय एक समावेशी समाज की आवश्यकता पर बल देता है।

04भारत में सामाजिक परिवर्तन और विकास
यह इकाई औद्योगीकरण, नगरीकरण और भूमंडलीकरण जैसी प्रक्रियाओं के कारण भारतीय समाज में आ रहे संरचनात्मक और सांस्कृतिक परिवर्तनों का अध्ययन करती है।
भारत में औद्योगीकरण और नगरीकरण की प्रक्रिया और इसके सामाजिक प्रभाव। यह विषय ग्रामीण से शहरी प्रवास और मलिन बस्तियों की समस्या को भी छूता है।
भूमंडलीकरण के आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक आयामों का भारतीय समाज पर प्रभाव। इसमें उदारीकरण और निजीकरण की नीतियों का भी विश्लेषण है।
जनसंचार माध्यमों (प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल) की भूमिका और समाज पर उनका प्रभाव। यह विषय जनमत निर्माण में मीडिया की शक्ति को दर्शाता है।

05सामाजिक आंदोलन
इस इकाई में सामाजिक आंदोलनों की अवधारणा, उनके प्रकार और भारतीय समाज में उनके प्रभाव का अध्ययन किया गया है।
सामाजिक आंदोलनों के अर्थ, प्रकार और सिद्धांतों का परिचय। यह विषय बताता है कि सामाजिक आंदोलन कैसे जन्म लेते हैं और समाज को कैसे बदलते हैं।
भारत में स्वतंत्रता पूर्व और स्वतंत्रता पश्चात हुए प्रमुख कृषक और श्रमिक आंदोलनों का अध्ययन। यह विषय उनके अधिकारों के संघर्ष को रेखांकित करता है।
चिपको आंदोलन जैसे प्रमुख पर्यावरण आंदोलनों और समकालीन महिला आंदोलनों का विश्लेषण। यह विषय सतत विकास और लैंगिक न्याय की मांग पर केंद्रित है।