India · CBSE Learning Outcomes
Class 11 समाजशास्त्र.
समाजशास्त्र कक्षा 11 का पाठ्यक्रम छात्रों को समाज, उसकी संरचना और सामाजिक संस्थाओं की बुनियादी समझ प्रदान करता है। यह पाठ्यक्रम सामाजिक परिवर्तन, संस्कृति और सामाजिकरण जैसी प्रमुख अवधारणाओं का आलोचनात्मक विश्लेषण करने में मदद करता है।

01समाजशास्त्र का परिचय
यह इकाई समाजशास्त्र की उत्पत्ति, इसके विषय क्षेत्र और अन्य सामाजिक विज्ञानों के साथ इसके संबंधों की रूपरेखा प्रस्तुत करती है।
यह विषय समाजशास्त्र की उत्पत्ति और समाज के साथ इसके संबंधों की व्याख्या करता है। छात्र व्यक्तिगत और सार्वजनिक मुद्दों के बीच के अंतर को समझेंगे।
इस विषय में समाजशास्त्र की तुलना इतिहास, अर्थशास्त्र और राजनीति विज्ञान जैसे अन्य सामाजिक विज्ञानों से की जाती है। यह समाजशास्त्र के अंतःविषय दृष्टिकोण को स्पष्ट करता है।
छात्र सामाजिक समूह, प्रस्थिति, भूमिका और सामाजिक नियंत्रण जैसी बुनियादी समाजशास्त्रीय अवधारणाओं का अध्ययन करेंगे। ये अवधारणाएं समाज को समझने के लिए आधारभूत हैं।

02सामाजिक संस्थाओं को समझना
इस इकाई में परिवार, विवाह, अर्थव्यवस्था, राजनीति और धर्म जैसी प्रमुख सामाजिक संस्थाओं की संरचना और कार्यों का अध्ययन किया गया है।
यह विषय परिवार, विवाह और नातेदारी जैसी प्राथमिक सामाजिक संस्थाओं के अर्थ और प्रकारों पर प्रकाश डालता है। इसमें समय के साथ इन संस्थाओं में आए बदलावों का भी विश्लेषण किया गया है।
छात्र समाज में कार्य, श्रम विभाजन और राज्य जैसी आर्थिक और राजनीतिक संस्थाओं की भूमिका का अध्ययन करेंगे। यह विषय सत्ता और अधिकार की अवधारणाओं को भी छूता है।
इस विषय में धर्म और शिक्षा को सामाजिक संस्थाओं के रूप में देखा गया है जो समाज में मूल्य और ज्ञान का संचार करती हैं। यह सामाजिकरण में इनकी भूमिका का मूल्यांकन करता है।

03संस्कृति और समाजीकरण
यह इकाई संस्कृति के विभिन्न आयामों और व्यक्ति के समाजीकरण की प्रक्रिया में इसकी भूमिका को स्पष्ट करती है।
यह विषय संस्कृति की परिभाषा, इसके भौतिक और अभौतिक पहलुओं और सांस्कृतिक विविधता पर केंद्रित है। छात्र समझेंगे कि संस्कृति मानव व्यवहार को कैसे निर्देशित करती है।
छात्र समाजीकरण की अवधारणा और इसके विभिन्न चरणों का अध्ययन करेंगे। यह विषय बताता है कि कैसे एक जैविक प्राणी एक सामाजिक प्राणी में बदलता है।
इस विषय में परिवार, स्कूल, सहकर्मी समूह और जनसंचार माध्यमों जैसी समाजीकरण की प्रमुख एजेंसियों की भूमिका का विश्लेषण किया गया है। यह आधुनिक समाज में मीडिया के बढ़ते प्रभाव को भी दर्शाता है।

04समाजशास्त्र में अनुसंधान पद्धतियां
इस इकाई में सामाजिक अनुसंधान के महत्व और समाजशास्त्रीय अध्ययन में प्रयुक्त होने वाली विभिन्न विधियों का परिचय दिया गया है।
यह विषय सामाजिक अनुसंधान की आवश्यकता और इसके वैज्ञानिक दृष्टिकोण को स्पष्ट करता है। छात्र वस्तुनिष्ठता और व्यक्तिपरकता के बीच के अंतर को समझेंगे।
छात्र सर्वेक्षण और साक्षात्कार जैसी मात्रात्मक और गुणात्मक अनुसंधान विधियों के उपयोग और सीमाओं का अध्ययन करेंगे। यह विषय डेटा संग्रह की व्यावहारिक समझ प्रदान करता है।
इस विषय में सहभागी और असहभागी अवलोकन तथा क्षेत्र कार्य (फील्ड वर्क) के महत्व पर चर्चा की गई है। छात्र समाजशास्त्रीय अध्ययन में प्रत्यक्ष अनुभव की भूमिका को समझेंगे।

05सामाजिक संरचना, स्तरीकरण और सामाजिक प्रक्रियाएं
यह इकाई समाज की संरचना, उसमें मौजूद असमानताओं और सहयोग तथा संघर्ष जैसी सामाजिक प्रक्रियाओं का विश्लेषण करती है।
यह विषय समाज की संरचनात्मक व्यवस्था और जाति, वर्ग तथा लिंग के आधार पर सामाजिक स्तरीकरण की व्याख्या करता है। यह समाज में असमानता के कारणों का विश्लेषण करता है।
छात्र समाज में सहयोग, प्रतिस्पर्धा और संघर्ष जैसी बुनियादी सामाजिक प्रक्रियाओं का अध्ययन करेंगे। यह विषय बताता है कि ये प्रक्रियाएं सामाजिक जीवन को कैसे संतुलित करती हैं।
इस विषय में सामाजिक संघर्ष की प्रकृति और सामाजिक परिवर्तन लाने में इसकी भूमिका पर चर्चा की गई है। छात्र समझेंगे कि समाज समय के साथ कैसे विकसित और परिवर्तित होता है।