India · CBSE Learning Outcomes
Class 12 दर्शनशास्त्र.
कक्षा 12 का दर्शनशास्त्र पाठ्यक्रम छात्रों को भारतीय और पाश्चात्य दार्शनिक परंपराओं, नैतिकता और सामाजिक-राजनीतिक दर्शन से परिचित कराता है। यह छात्रों में आलोचनात्मक सोच, नैतिक तर्क और जीवन के मूलभूत प्रश्नों के प्रति गहरी समझ विकसित करने पर केंद्रित है।

01भारतीय दर्शन की रूपरेखा
यह इकाई भारतीय दर्शन की उत्पत्ति, प्रकृति, और इसके आस्तिक तथा नास्तिक संप्रदायों के मूलभूत सिद्धांतों का परिचय देती है।
भारतीय दर्शन की उत्पत्ति, प्रकृति और इसकी प्रमुख विशेषताओं का अध्ययन। यह विषय आध्यात्मिक और व्यावहारिक दृष्टिकोण को स्पष्ट करता है।
वेदों की प्रामाणिकता के आधार पर भारतीय दर्शन के आस्तिक (षड्दर्शन) और नास्तिक (चार्वाक, जैन, बौद्ध) संप्रदायों का वर्गीकरण।
भगवद्गीता में वर्णित निष्काम कर्म और स्वधर्म की अवधारणा का विश्लेषणात्मक अध्ययन। यह आधुनिक जीवन में कर्मयोग की प्रासंगिकता को दर्शाता है।

02पाश्चात्य दर्शन के प्रमुख सिद्धांत
इस इकाई में पाश्चात्य ज्ञानमीमांसा के प्रमुख सिद्धांतों, विशेषकर बुद्धिवाद, अनुभववाद और कांट के समीक्षावाद का विश्लेषण किया गया है।
डेकार्ट, स्पिनोज़ा और लाइबनिज़ के अनुसार ज्ञान की उत्पत्ति में बुद्धि की भूमिका। इसमें जन्मजात विचारों के सिद्धांत का मूल्यांकन किया गया है।
जॉन लॉक, जॉर्ज बर्कले और डेविड ह्यूम के अनुसार अनुभव ही ज्ञान का एकमात्र स्रोत है। यह विषय जन्मजात विचारों का खंडन करता है।
इमैनुअल कांट द्वारा बुद्धिवाद और अनुभववाद का समन्वय। यह विषय ज्ञानमीमांसा में कांट की 'कोपरनिकन क्रांति' को समझाता है।

03अनुप्रयुक्त नीतिशास्त्र
यह इकाई नैतिक सिद्धांतों और समकालीन जीवन में उनके अनुप्रयोग, जैसे पर्यावरणीय और चिकित्सा नैतिकता पर केंद्रित है।
शुभ, उचित, कर्तव्य और उत्तरदायित्व जैसी नैतिक अवधारणाओं का परिचय। यह विषय मानवीय आचरण के मूल्यांकन के मापदंड स्थापित करता है।
बेंथम और मिल के उपयोगितावाद (अधिकतम लोगों का अधिकतम सुख) और कांट के निरपेक्ष आदेश का तुलनात्मक अध्ययन।
पर्यावरण संरक्षण, पशु अधिकार और चिकित्सा क्षेत्र (जैसे इच्छामृत्यु) से जुड़े समकालीन नैतिक मुद्दों का विश्लेषण।

04सामाजिक और राजनीतिक दर्शन
यह इकाई समाज, राज्य, न्याय, समानता और मानवाधिकारों जैसी प्रमुख राजनीतिक अवधारणाओं का दार्शनिक विश्लेषण प्रस्तुत करती है।
समाज, राष्ट्र और राज्य की अवधारणाओं और उनके अंतर्संबंधों का अध्ययन। यह व्यक्ति और राज्य के बीच संबंधों को स्पष्ट करता है।
न्याय, समानता और स्वतंत्रता के राजनीतिक आदर्शों का दार्शनिक विश्लेषण। इसमें इन अवधारणाओं के विभिन्न प्रकारों पर चर्चा की गई है।
शासन प्रणाली के रूप में लोकतंत्र का मूल्यांकन और मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा का अध्ययन।