India · CBSE Learning Outcomes
Class 11 दर्शनशास्त्र.
यह पाठ्यक्रम कक्षा 11 के छात्रों को दर्शनशास्त्र के मूल सिद्धांतों और भारतीय तथा पाश्चात्य दार्शनिक परंपराओं से परिचित कराता है। इसमें ज्ञानमीमांसा, तत्वमीमांसा और नीतिशास्त्र के प्रमुख प्रश्नों का आलोचनात्मक विश्लेषण किया जाएगा।

01दर्शनशास्त्र का परिचय
दर्शनशास्त्र की प्रकृति, शाखाओं और मानव जीवन में इसके महत्व का अध्ययन।
दर्शनशास्त्र की परिभाषा, इसका क्षेत्र और विज्ञान के साथ इसके संबंधों का विश्लेषण।
तत्वमीमांसा, ज्ञानमीमांसा, नीतिशास्त्र और तर्कशास्त्र जैसी प्रमुख दार्शनिक शाखाओं का परिचय।
दर्शनशास्त्र और धर्म के बीच संबंधों, समानताओं और भेदों का आलोचनात्मक मूल्यांकन।

02भारतीय दर्शन की रूपरेखा
भारतीय दार्शनिक प्रणालियों (आस्तिक और नास्तिक) की मुख्य विशेषताओं का परिचय।
भारतीय दर्शन की मूल प्रवृत्तियों, पुरुषार्थ और आस्तिक-नास्तिक वर्गीकरण का अध्ययन।
चार्वाक के जड़वाद, ज्ञानमीमांसा और सुखवादी नीतिशास्त्र का विस्तृत विश्लेषण।
जैन दर्शन के स्याद्वाद और बौद्ध दर्शन के चार आर्य सत्यों तथा क्षणिकवाद का अध्ययन।
न्याय दर्शन की प्रमाण मीमांसा और वैशेषिक दर्शन के पदार्थ सिद्धांत का परिचय।

03पाश्चात्य दर्शन के मूल सिद्धांत
पाश्चात्य दर्शन में ज्ञानमीमांसा और तत्वमीमांसा के प्रमुख विचारकों का अध्ययन।
रेने देकार्त की संदेह पद्धति और उनके द्वैतवादी दर्शन का आलोचनात्मक अध्ययन।
डेविड ह्यूम के अनुभववादी दृष्टिकोण और कारण-कार्य संबंध पर उनके विचारों का विश्लेषण।
इमैनुअल कांट द्वारा बुद्धिवाद और अनुभववाद के समन्वय का दार्शनिक मूल्यांकन।

04नीतिशास्त्र और सामाजिक दर्शन
नैतिक अवधारणाओं, मूल्यों और सामाजिक न्याय के दार्शनिक आधारों का विश्लेषण।
शुभ, अशुभ, उचित, अनुचित और संकल्प की स्वतंत्रता जैसी नैतिक अवधारणाओं का परिचय।
श्रीमद्भगवद्गीता के निष्काम कर्म योग और स्वधर्म के सिद्धांत का दार्शनिक अध्ययन।
सामाजिक न्याय, समानता और मानवाधिकारों के दार्शनिक आधारों की विवेचना।