India · CBSE Learning Outcomes
Class 11 लेखाशास्त्र.
कक्षा 11 के लिए लेखाशास्त्र का यह पाठ्यक्रम छात्रों को लेखांकन के मूलभूत सिद्धांतों और प्रक्रियाओं से परिचित कराता है। यह वित्तीय लेन-देन की रिकॉर्डिंग, वर्गीकरण और वित्तीय विवरण तैयार करने की समझ विकसित करता है।

01लेखांकन का सैद्धांतिक आधार
यह इकाई लेखांकन की बुनियादी अवधारणाओं, सिद्धांतों और मानकों का परिचय देती है। यह व्यवसाय की भाषा के रूप में लेखांकन की भूमिका को स्पष्ट करती है।
लेखांकन की परिभाषा, उद्देश्य और इसके विभिन्न प्रकारों का अध्ययन। यह व्यवसाय की भाषा के रूप में लेखांकन की भूमिका को स्पष्ट करता है।
व्यवसाय इकाई, मुद्रा मापन और द्विपक्षीय अवधारणा जैसे मूलभूत सिद्धांतों की समझ। ये सिद्धांत लेखांकन प्रक्रिया का आधार बनाते हैं।
भारत में लागू लेखांकन मानकों (AS) और भारतीय लेखांकन मानकों (Ind-AS) का परिचय। यह वित्तीय विवरणों में एकरूपता लाने के महत्व को समझाता है।

02लेन-देन का अभिलेखन
इस इकाई में व्यावसायिक लेन-देनों को दर्ज करने की प्रक्रिया सिखाई जाती है। इसमें रोजनामचा, खाता बही और सहायक बहियों का निर्माण शामिल है।
लेखांकन समीकरण के माध्यम से संपत्तियों, देयताओं और पूंजी के संबंधों का विश्लेषण। रोजनामचा (Journal) में प्रारंभिक प्रविष्टियां करने की प्रक्रिया।
रोजनामचे से खाता बही (Ledger) में लेन-देनों को स्थानांतरित करने की प्रक्रिया। खातों का शेष निकालना और उनका वर्गीकरण करना।
नकद लेन-देनों के लिए रोकड़ बही और उधार लेन-देनों के लिए क्रय-विक्रय बहियों का निर्माण। यह विशेष बहियों के उपयोग को दर्शाता है।

03बैंक समाधान विवरण और मूल्यह्रास
यह इकाई बैंक शेष के मिलान और स्थायी संपत्तियों के मूल्यह्रास की गणना पर केंद्रित है। इसमें प्रावधान और संचय की अवधारणाएं भी शामिल हैं।
रोकड़ बही के बैंक कॉलम और पासबुक के शेष में अंतर के कारणों की पहचान करना। इन दोनों के बीच मिलान करने के लिए विवरण तैयार करना।
स्थायी संपत्तियों के मूल्य में कमी (मूल्यह्रास) के कारणों और इसके लेखांकन का अध्ययन। सीधी रेखा और क्रमागत ह्रास विधियों की गणना।
भविष्य की अनिश्चितताओं और ज्ञात देयताओं के लिए प्रावधान और संचय बनाने की आवश्यकता। दोनों के बीच के अंतर को समझना।

04वित्तीय विवरण
इस इकाई में व्यावसायिक उद्यमों के अंतिम खाते तैयार करना सिखाया जाता है। यह व्यवसाय की लाभप्रदता और वित्तीय स्थिति का आकलन करने में मदद करता है।
एक व्यावसायिक इकाई के वित्तीय प्रदर्शन और स्थिति को दर्शाने वाले विवरणों का अवलोकन। इसमें पूंजीगत और आयगत व्यय का अंतर शामिल है।
सकल लाभ और शुद्ध लाभ की गणना के लिए व्यापारिक और लाभ-हानि खाता तैयार करना। यह व्यवसाय की परिचालन दक्षता को मापता है।
एक निश्चित तिथि पर व्यवसाय की संपत्तियों और देयताओं को दर्शाने वाले तुलन पत्र (Balance Sheet) का निर्माण। यह वित्तीय स्थिति का सटीक चित्र प्रस्तुत करता है।
एकल प्रविष्टि प्रणाली के तहत रखे गए अपूर्ण अभिलेखों से लाभ या हानि का निर्धारण। स्थिति विवरण के माध्यम से वित्तीय स्थिति ज्ञात करना।